Home / DMIT & MIDBRAIN / Improve Creativity

Improve Creativity

साभार (भास्कर डॉट कॉम)
Creativity खुद को जानने का रास्ता है। क्या आपके अंदर क्रिएटिव जीन है? यदि आपके पास नहीं हैं तो घबराए नहीं। यहां हम आसान पांच स्टेप्स बता रहे हैं…
अनूठा या नया सोचने वालों की हमेशा तारीफ करें। हर उस सोच या काम के लिए बधाई दें, जो नया हो। जब आप अपने आसपास देखेंगे तो ऐसे कई लोग और काम नजर आ जाएंगे, जिसमें अनूठापन और नयापन होगा। जब आप दूसरों के ऐसे विचारों को सराहना शुरू करेंगे तो खुद को ऐसे रास्ते पर पाएंगे जो अनूठी सोच की तरफ जाता है।
यदि जीवन जीना ही सवाल है तो हम सामान्य काम को अन्य लोगों से बेहतर करते हुए भी इस प्रतिस्पर्धी दुनिया में बड़ी सहजता से जी सकते हैं। यदि आप तरक्की चाहते हैं तो हमें अपने दिमाग को झकझोरना होगा। हमें अपनी क्षमता को बढ़ाने और क्रिएटिविटी पर सोचना होगा। आइये हम उन पांच तरीकों को जाने, जो हमें क्रिएटिवि थिंकिंग की ओर लेकर जाएंगे..
जुनून
1995 में शब्बीर भाटिया एपल के लिए काम करते थे। जैक स्मिथ और शब्बीर दोनों स्टैनफोर्ड से ग्रेजुएट थे और इन्फॉरमेशन टेक्नोलॉजी में बड़ा नाम कमाना चाहते थे। दोनों ने एक सॉफ्टवेयर बनाया। ‘जावासॉफ्ट’ नाम दिया। इस पर व्यक्तिगत डेटा रखा जा सकता था। एक बार जब दोनों ने सॉफ्टवेयर की मूल संरचना पर काम कर लिया तो उन्होंने अपने प्रोजेक्ट पर पूंजी लगाने के लिए कुछ लोगों से मुलाकात की। लेकिन किसी भी पूंजीपति को इस कॉन्सेप्ट का भविष्य बेहतर नहीं लगा। उन्हें बार-बार नकारा गया लेकिन वे दुगने उत्साह से अपने प्रोजेक्ट पर जुटे रहे। दोनों इसे बिजनेस प्रोजेक्ट बनाने में लगे रहे। एक दिन स्मिथ को जावासॉफ्ट में ईमेल जोडऩे का विचार आया। स्मिथ ने शब्बीर को फोन कर यह सुझाव दिया। शब्बीर बेहद उत्साहित हुआ और इस योजना पर आगे बढऩे को कहा। शुरू में जैक का विचार ईमेल को अतिरिक्त एप्लीकेशन के तौर पर जोड़ना भर था। लेकिन शब्बीर एक कदम आगे बढऩा चाह रहा था।  उसने ईमेल को मुख्य और जावासॉफ्ट को अतिरिक्त सेवा के तौर पर शुरू करने का विचार दिया।
भाटिया और स्मिथ दोनों इसे नया नाम देने के लिए रातभर माथापच्ची करते रहे। कई नामों स्पीडमेल, हाइपरमेल, सुपरमेल, ईनी-मीनी-माइना मेल आदि पर विचार किया। अंतत: हॉटमेल पर सहमति बन गई। यह न सिर्फ याद करने में आसान था बल्कि इसमें एचटीएमएल (हाइपरटेक्स्ट मार्क-अप लैंग्वेज) भी शामिल थी। यह सर्विस चार जुलाई 1996 को लॉन्च की गई। दिसंबर तक इसके लाखों यूजर थे। जुलाई 1997 तक इसके यूजर एक करोड़ पहुंच चुके थे। बाकी सब इतिहास है।
 
यदि आप उन लोगों में शामिल हैं, जो हर सोमवार काम पर जाने से पहले सुबह-सुबह बेवजह झल्लाते हैं और स्कूलबॉय जैसी आदतों से बाहर नहीं निकल पाए हैं… तो आपके कॅरियर की रक्षा भगवान ही करे। यदि काम आपके लिए मजबूरी की तरह है तो आपके दिमाग में रचनात्मक विचार आना असंभव ही है। अपने काम को जुनून बनाएं, रचनात्मकता का पहला चरण यहीं से शुरू होता है। यदि आप ऐसा नहीं कर पा रहे हैं तब ऐसे काम की तलाश शुरू कर दीजिए जिसे आप प्रेम करें, जुनून बना सकें। ऐसा काम मिलते ही पहला जॉब छोड़कर इसे अपना लें।
रॉल्फ वाल्दो एमर्सन ने ठीक ही कहा है, ‘कोई भी महान काम बिना उत्साह के नहीं किया जा सकता है।’ उत्साह अंग्रेजी इंथुइजम का हिंदी रूपांतर है। इंथुइजम यूनानी भाषा के दो शब्दों से मिलकर बना है इन और थू, जिसका मतलब है इन गॉड यानी ईश्वर में। यदि आप अपने काम या जिम्मेदारी के प्रति उत्साहित हैं तभी कॉस्मिक कंम्यूटर यानी ईश्वर से जुड़ाव महसूस कर सकते हैं। और एक बार जब ऐसा हो जाता है तो आप अनंत संभावनाओं-समाधानों-विचारों के स्रोत बन जाते हैं। काम के प्रति जुनून या पागलपन ही रचनात्मक विचारों का मूल आधार है।
 
तारीफ करें:
अपनी रचनात्मकता को बढ़ावा देने के लिए जरूरी है कि आप अनूठा या नया सोचने वालों को शाबाशी दें। हर उस सोच या काम के लिए बधाई दें जो अनूठा या नया हो। जब आप अपने आसपास देखेंगे तो ऐसे कई लोग और काम नजर आ जाएंगे, जिसमें अनूठापन और नयापन नजर आएगा। उनकी तारीफ करें। जब आप दूसरों के ऐसे विचारों को सराहना शुरू करेंगे तो खुद को ऐसे रास्ते पर पाएंगे जो अनूठी सोच की तरफ जाता है। माइक्रोसॉफ्ट अनूठा सोचने की क्षमता वाले कर्मचारियों की सराहना कर, प्रोत्साहित कर और पुरस्कृत कर ही आज दुनिया की सबसे कामयाब और अमीर कंपनी बन चुकी है।
नई संभावनाएं ढूंढना:
हेनरी फोर्ड बचपन से ही कुशाग्र बुद्धि का था। जो मिलता उसी को हाथ में लेकर खेलने लगता। छोटा था तभी से घडिय़ां सुधारने लगा था। मशीनों से इतना लगाव था कि उसने सारी जवानी यही जानने में लगा दी कि आखिर ये काम कैसे करती हैं और इसे और बेहतर कैसे बनाया जा सकता है। कार तो जैसे उसकी जिंदगी का केंद्र बिंदु थी। वह कार बनाता, रेसिंग करता और उसे बेच देता। लेकिन ऑटोमोबाइल के अलावा भी उसकी जिंदगी में बहुत चीजें थी। उसे अनेक चीजों में दिलचस्पी थी और प्रकृति के प्रति बड़ी जिज्ञासा थी। उसने नए क्षेत्र में कुछ करने और नई चीजें सीखने से खुद को कभी नहीं रोका। वैज्ञानिक अनुसंधानों पर उसे बड़ा भरोसा था। वह उन्हें आजमाने में हमेशा आगे रहता। प्रयोग तो उसकी आदत बन गई थी। उसके सामने जो भी चीजें आईं, उसने सबको आजमाया। यह जानने की कोशिश की कि इसके काम करने का आधार क्या है और इसे कैसे बेहतर किया जा सकता है।
बचपन में हम सभी हेनरी फोर्ड जैसे ही थे। जिज्ञासा से भरे होते थे और जो हाथ में आता उसके बारे में जानने-समझने की कोशिश करते थे। लेकिन बड़े होने की प्रक्रिया में हमने यह प्रवृत्ति कहीं खो दी। रचनात्मकता विकसित करने के लिए हमें अपने भीतर की जिज्ञासा और नईसंभावनाएं तलाशने की आदत फिर डालनी होगी। हमें खुद से यह सवाल करने की आदत डालनी होगी: आखिर यह इसी तरीके से क्यों होना होना चाहिए? दूसरे तरीके से क्यों नहीं होना चाहिए? मुझे इसी तरीके से खाना क्यों बनाना चाहिए? यही डिश दूसरे तरीके से क्यों नहीं बनाया जा सकता? मैं कोई नई डिश क्यों नहीं बना सकती? मुझे रोज एक ही खेल क्यों खेलना चाहिए? मैं कोई ऐसा खेल क्यों नहीं ईजाद कर सकता जो अब से पहले कभी न खेला गया हो? क्यों और क्यों नहीं, बस ये पूछने और जानने की कोशिश हमें काफी कुछ नया सिखा देती है।
क्या कोई और तरीका हो सकता है?
यह सवाल पूछने से पहले अपने भीतर आत्मसुधार की इच्छा मजबूत करें। भीतर से यह आवाज आनी चाहिए कि हमें खुद में लगातार सुधार करते रहना है। जब आप अपने काम के प्रति जुनूनी होंगे और आत्मसुधार की भावना कायम रखेंगे तो आपको यह सवाल, क्या कोई और तरीका हो सकता है, जबरदस्ती पूछने की जरूरत ही नहीं पड़ेगी। यह सवाल खुद-ब-खुद मन में आएगा।
यदि आप सेल्समैन हैं और आपको अपना काम पसंद है और अपने बेचने की कला को बेहतर करना चाहते हैं तो आप इसके नए-नए तरीके ईजाद करते रहेंगे। आप अपने ही रिकॉर्ड तोड़ते रहेंगे और नए प्रतिमान तय करेंगे, जिसका लोग अनुसरण करेंगे।
हेनरी फोर्ड की पहली पसंद कार थी। वे हमेशा इसे बेहतर बनाने को सोचते रहे। नए तरीके ईजाद करते रहे और उन्होंने दुनिया की सबसे बेहतरीन कार बनाई। जब केके पटेल ने निरमा केमिकल्स की स्थापना की तब वे खुद ही वॉशिंग पाउडर (निरमा) बेचते थे और उनकी सवारी थी साइकिल। मुश्किलों के बावजूद वे अपने काम पर जुटे रहे। वॉशिंग पाउडर की गुणवत्ता सुधारने और बेहतर मार्केटिंग के तरीके ढूंढ़ते रहे और एक दिन उन्होंने निरमा को अंतरराष्ट्रीय ब्रांड बना दिया।
अमल कीजिए
हर्बर्ट स्पेंसर ने कहा है, ‘शिक्षा का पहला उद्देश्य जानकारी या ज्ञान बढ़ाना नहीं है बल्कि उस पर अमल करना है।‘
पिता कैसे बनना है? यदि कोई व्यक्ति इस विषय पर एक हजार बार किताब पढ़े तब भी वह पिता नहीं बन पाएगा। इसी तरह आपके दिमाग में कितना भी अच्छा विचार क्यों न आया हो, यदि आप इस पर अमल नहीं करते तो यह व्यर्थ है। जब कभी भी आपके दिमाग में कोई नया विचार कौंधे और आपको लगे कि यह अच्छा विचार है, तो दूसरी चीजों से ध्यान हटाकर इस पर केंद्रित करें। इस विचार के बारे में गहराई से सोचें। हर कोण से सोचें। सभी संभावनाओं पर विचार करें। अच्छा लगे तो इस पर अमल करने के लिए आगे बढ़ें।
रचनात्मकता Self Actualization की ओर जाने का रास्ता है। रचनात्मक होने के बाद आप पूर्ण संतोष का अनुभव करेंगे। मन में उपलब्धि का एक भाव रहेगा। इसलिए अपने दिमाग पर जोर डालते रहें, उसे झकझोरते रहें- आप जिंदगी की हद को नहीं जानते कि यह आपको कहां ले जा सकती है।
 
महात्रया रा-

महात्रया रा आध्‍यात्‍मिक गुरु हैं। वे देश-विदेश में अपने आध्‍यात्‍मिक व्‍याख्‍यानों के माध्‍यम से लोगों को सेल्‍फ रियलाइजेशन के लिए मार्गदर्शित करते हैं। उनके प्रभावी संदेश व्‍यक्‍ति की नकारात्‍मक ऊर्जा को सकारात्‍मक ऊर्जा में परिवर्तित करके जीवन की दिशा बदल देते हैं। उनके व्‍याख्‍यान सुनकर कई प्रसिद्ध हस्‍तियां, बिजनेसमैन, स्‍पोटर्सपर्सन और स्‍टूडेंट़स अपनी आंतरिक ऊर्जा की मदद से नई ऊंचाइयां प्राप्‍त कर चुके हैं। महात्रया रा जीवन जीने का एक नया रास्‍ता बताते हैं – ‘इंफीनीथीज्‍म’, जिसके माध्‍यम से मनुष्‍य को अपनी असीम क्षमता का अहसास हो सकता है।

इंफीनीमैगजीन-

इंफीनीमैगजीन प्रेरक कहानियों, उद्धरणों, विकासोन्मुख पोस्टरों और महान व्यक्तियों के विचारों से बनी है। दुनिया पर अमिट छाप छोड़ने वाले अलग-अलग पृष्ठभूमि के महान लोगों और बिना कुछ बोले विपरीत हालात में महान ऊंचाइयां छूने वाले लोगों पर नियमित कॉलम्स हैं। यह मैगजीन पाठकों को विपरीत हालात से जूझने के लिए प्रेरित करती है। इंफीनीमैगजीन के माध्‍यम से महात्रया रा लोगों को अपनी पूरी क्षमता और वो ऊंचाइयां हासिल करने के लिए प्रोत्साहित करते हैं, जहां तक वे अधिकारपूर्वक पहुंच सकते हैं।

http://infinimagazine.com/
साभार (भास्कर डॉट कॉम)

One comment

  1. life changing website, when i first time suffering this website i feel like (mil gaya jo chahiya tha) , till the first day to now i will continue suffering this website on regular basis atleast once time in a day and improve my self with consistent effort.so thanks sanjiv malik sir

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

*